लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
आदित्य वैष्णव द्वितीय, दिशांत सैनी तृतीय, दर्शकों ने भी दिया जोरदार उत्साहवर्धन
भीलवाड़ा। (पंकज पोरवाल) – श्री महेश सेवा समिति द्वारा संचालित श्री महेश पब्लिक स्कूल, प्राइमरी विंग में दो दिवसीय “कौन बनेगा एसएमपीएस मास्टर माइंड” प्रतियोगिता का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। प्रतियोगिता का उद्देश्य बच्चों और उनके अभिभावकों में सामान्य ज्ञान, तार्किक सोच और त्वरित निर्णय क्षमता को विकसित करना था।
प्रतियोगिता का प्रारूप
प्रतियोगिता दो चरणों में आयोजित की गई। प्रथम दिन प्रतियोगिता का प्री राउंड रखा गया, जिसमें कक्षा 3 से 5 तक के विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दिन विशिष्ट अतिथि भैरुलाल काबरा, गोविंद प्रसाद सोडानी और महेश सेवा समिति के पदाधिकारी उपस्थित रहे। राउंड में प्रतिभागियों को “सोचो और सही विकल्प चुनो”, ध्वनि/आवाज़ पहचान, वीडियो आधारित प्रश्न, इमोजी से शब्द या संदेश पहचान और “मैजिकल मिस्ट्री बॉक्स” जैसी चुनौतीपूर्ण गतिविधियों का सामना करना पड़ा।
दूसरे दिन फाइनल राउंड आयोजित हुआ, जिसमें बौद्धिक बहुविकल्पीय प्रश्न, पहेलियों का महासंग्राम, ऑडियो आधारित रोमांचक प्रश्न, स्क्रीन देखकर उत्तर देना और भाग्य/किस्मत पासा जैसे राउंड शामिल थे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ममता मोदानी, राजकुमार काल्या, उम्मेद सिंह राठौड़, राजेश शर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। अतिथियों और समिति सदस्यों ने माँ सरस्वती का दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
प्रतियोगिता के परिणाम
प्रतियोगिता में कक्षा 3 की रियांशी न्याती ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। आदित्य वैष्णव (कक्षा 4) को द्वितीय और दिशांत सैनी (कक्षा 3) को तृतीय स्थान से सम्मानित किया गया।
आयोजकों की प्रतिक्रिया
श्री महेश सेवा समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश नराणीवाल ने कहा कि प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों ने अपनी मेहनत, प्रतिभा और आत्मविश्वास से साबित कर दिया कि वे देश का उज्जवल भविष्य हैं। समिति के सचिव राजेंद्र कुमार कचौलिया ने प्रतिभागियों और अभिभावकों की सराहना करते हुए कहा कि उत्साह और लगन के साथ भाग लेने से प्रतियोगिता की सफलता सुनिश्चित हुई।
विद्यालय की प्रधानाचार्या निधि झा भार्गव ने बताया कि इस प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों में ज्ञान के साथ-साथ रचनात्मक सोच और अनुशासन विकसित हुआ है।
प्रतियोगिता ने यह भी साबित कर दिया कि सच्चा ज्ञान रटने से नहीं, बल्कि समझने से आता है। दर्शकों ने भी उत्साहवर्धक तालियों के साथ प्रतिभागियों का हौसला बढ़ाया।
