Home latest पूर्व आईएएस अधिकारियों ने राज्य सरकार के निर्णय को सराहा

पूर्व आईएएस अधिकारियों ने राज्य सरकार के निर्णय को सराहा

0

 

जिलों एवं संभागों के पुनर्निर्धारण को बताया उचित एवं व्यावहारिक

लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

जयपुर।( रितु मेहरा )भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों ने राज्य सरकार के नवसृजित जिलों एवं संभागों के पुनर्निर्धारण के निर्णय की सराहना की है। उन्होंने प्रशासनिक आवश्यकता, कानून व्यवस्था एवं वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के दृष्टिकोण से मंत्रिमण्डल द्वारा लिए गए इस फैसले को उचित एवं व्यावहारिक बताते हुए अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की।

राज्य सरकार द्वारा नवगठित जिलों एवं संभागों के पुनर्निर्धारण का फैसला स्वागत योग्य है, सरकार के इस सराहनीय फैसले के दूरगामी परिणाम नजर आएंगे।
–  सत्य प्रकाश बसवाला, सेवानिवृत्त आईएएस

राज्य सरकार द्वारा 9 जिलों को वापस समाप्त करने का निर्णय उत्तम प्रतीत होता है, प्रशासनिक दृष्टि से यह सही फैसला है। मर्ज किए गए जिले तहसील स्तर के हैं, जहां क्षेत्रफल भी कम है व जनसंख्या भी यूपी की तरह बहुत अधिक नहीं है। कुल मिलाकर यह निर्णय उत्तम है।
–  एस.एस. बिस्सा, सेवानिवृत्त आईएएस

यह एक व्यावहारिक फैसला है, क्योंकि एक नया जिला बनाने में काफी खर्चा भी होता है। जयपुर ग्रामीण, जोधपुर ग्रामीण जैसे जिलों का कोई औचित्य ही नहीं था। इसका डीमार्केशन भी बड़ा मुश्किल हो जाता है और इसलिए डिस्ट्रीब्यूशन व्यावहारिक नहीं है। इसके अलावा जिले जिनमं एक-दो सबडिवीजन ही मुश्किल से हैं उनमें एक एडीएम बिठाकर भी काम चलाया जा सकता है। इसलिए यह जो फैसला किया है, यह एक बहुत ही व्यावहारिक फैसला है। इसी तरह बांसवाड़ा और पाली संभाग की तो जरूरत ही नहीं थी क्योंकि इनमें जिले ही बहुत कम थे।
–  अन्तर सिंह नेहरा, सेवानिवृत्त आईएएस, पूर्व जिला कलेक्टर, जयपुर

जनकल्याणकारी सरकार लोकहित में नीतिगत फैसले लेती है। केकड़ी जिला निर्धारित मापदंडों पर उचित नहीं ठहरता होगा। जिले के गठन के लिए अनेक पहलुओं का अध्ययन करने के उपरांत ही विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर ही बहुजन हितार्थ फैसला लिया गया है।
–  शिवजीराम प्रतिहार, सेवानिवृत्त आईएएस

प्रदेश में नए जिलों का सुव्यवस्थित विकास आवश्यक है। मानव संसाधन और इंफ्रास्ट्रकचर डवलपमेंट पर फ़ोकस करते हुए पर्याप्त राशि खर्च कर उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने से ही जनता को नये जिलों का सही मायने में फ़ायदा मिल सकता हैं।
डॉ. मोहन लाल यादव, सेवानिवृत्त आईएएस

छोटे जिलों को समाप्त करने से अनावश्यक व्यय में कमी आएगी। यह बजट विकास में खर्च हो सकेगा।
–  चंद्र प्रकाश कटारिया, पूर्व सचिव नगर निगम जयपुर

नए जिले वैज्ञानिक और भौगोलिक दृष्टि से सही नहीं थे। राज्य सरकार ने उप समिति बनाकर सर्वे और तर्कों के आधार पर उन्हें पूर्व जिले में मर्ज करने का निर्णय लिया हैं।
  टी आर मीना, पूर्व मुख्य सचिव केरल सरकार

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version