विनोद जाखड़ बने एनएसयूआई के सुप्रीमों

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

 पायलट  के  नजदीकी  विनोद  बने  अध्यक्ष 

जाखड़ पहले दलित एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष

जयपुर।   राजस्थान की धरती से निकला एक ऐसा युवा चेहरा, जिसने संघर्ष, आंदोलन और नेतृत्व के दम पर छात्र राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर तय किया।हम बात कर रहे हैं विनोद जाखड़ की,जिन्हें कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव वेणूगोपाल ने (NSUI)के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया है।

गांव से  दिल्ली तक  का  सफ़र 

विनोद जाखड़ मूल रूप से राजस्थान के जयपुर के विराटनगर के मैड़ गांव के रहने वाले हैं। इनका जन्म 7 सितंबर 1994 को एक साधारण किसान- मजदूर परिवार में हुआ। सात साल की उम्र में ही परिवार मजदूरी करने जयपुर आ गया,तब से विनोद जाखड़ अपने परिवार के साथ जयपुर में रह रहे हैं। चार भाई- बहिनों में सबसे बड़े विनोद जाखड़ की शिक्षा दिक्षा जयपुर में ही पूरी हुई। राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति में सक्रिय हुए। यहां जब कड़े संघर्ष के बाद भी पार्टी ने नकार दिया तो उन्होंने 2018 में राजस्थान विश्वविद्यालय से एनएसयूआई के बागी के तौर पर चुनाव लड़ा और राजस्थान विश्वविद्यालय के पहले दलित अध्यक्ष बने।

सचिन पायलट  का  मिला साथ 

जाखड़ को उस दौर का सबसे संघर्षशील छात्रनेता के तौर पर देखा जाता है, जिसने कई बार छात्र हितों के लिए संघर्ष किया और लाठियां खाई जिसके चलते सचिन पायलट जैसे दिग्गज नेता ने जाखड़ की प्रतिभा को पहचाना और राजनीति के पथ पर आगे बढ़ाने का काम किया। जाखड़ को एनएसयूआई का प्रदेश अध्यक्ष बनाने में सचिन पायलट का बड़ा योगदान है.। लेकिन उसके बाद एनएसयूआई को खड़ा करने और मजबूत करने में जाखड़ ने पूरी ताकत लगा दी। पूरे प्रदेशभर में धरने – प्रदर्शन किये, कई बार लाठियां खाई और जेल गए। पश्चिमी राजस्थान में साइकिल यात्रा निकालकर नशे के खिलाफ अभियान छेड़ा । हाल ही में राजस्थान विश्वविदयालय में आरएसएस के कार्यक्रम का विरोध किया यहां तक कि संघ के झंडे- बैनर तक फाड़ दिये जिसके चलते उन्हें लाठियों से पीटा गया 17 दिनों तक जेल रहना पड़ा । लेकिन इससे जाखड़ और मजबूत होकर उभरे ।

खुलकर  काम करने  से  रोका गया 

इस बीच एनएसयूआई के राष्ट्रीय नेता जो जाखड़ के विरोधी थे उन्हें खुलकर काम नहीं करने दे रहे थे। यहां तक की जाखड़ अपनी मर्जी से किसी नियुक्ति भी नहीं कर सकते थे। इसके बावजूद उन्होंने कुछ राजनीतिक नियुक्तियां की तो उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की धमकी दी गई. जिसका उनके समर्थकों ने कड़ा विरोध किया।  दिल्ली में बैठकर राहुल गांधी भी विनोद जाखड़ के संघर्ष को नजदीक से देख रहे थे। जिन्होंने जाखड़ के संघर्ष को देखते हुए एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर नियुक्ति को मंजूरी दी। इसके साथ ही एनएसयूआई को पहला दलित राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल गया। जाखड़ को एनएसयूआई की राष्ट्रीय कमान मिलने से एनएसयूआई देशभर में मजबूत होगी , वहीं दलित वर्ग का कांग्रेस के प्रति भरोसा फिर से मजबूत होगा….. जिसका लाभ आने वाले विधानसभा- लोकसभा चुनावों में भी कांग्रेस को मिलेगा।

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